Wednesday, December 8, 2010

तुम कह देना कोई ख़ास नहीं
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा,
एक झूठ है आधा सच्चा सा,
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा,
जीवन का एक ऐसा साथी है,
जो दूर हो के पास नहीं,
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं,
हवा का एक सुहाना झोंका है,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा,
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा,
जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र,
जो समंदर है पर दिल को प्यास नहीं,
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं,
एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है,
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है,

यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं,
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं|

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